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स्वास्थ्य विभाग आखिर कब करेगा झोलाछापों का इलाज? अवैध क्लीनिकों के जाल में दांव पर गरीबों की जिंदगी, गहरी नींद में सोया महकमा!

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राजेपुर के भरखा गांव में इंजेक्शन लगने के बाद 50 वर्षीय श्रीपाल की मौत, परिजनों ने कथित झोलाछाप पर लगाया आरोप; कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

लक्ष्मी शरण सिंह राठौड़ 

 फर्रुखाबाद l राजेपुर ग्रामीण क्षेत्रों में कथित झोलाछाप चिकित्सकों के इलाज पर अंकुश लगाने के दावों के बीच भरखा गांव में 50 वर्षीय श्रीपाल कुशवाह की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि कथित चिकित्सक नीरज के यहां इंजेक्शन लगवाने के बाद श्रीपाल की हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। आरोप यह भी है कि मौत के बाद संबंधित चिकित्सक दुकान बंद कर चला गया। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगी।


चौथा इंजेक्शन लगने के बाद बिगड़ी हालत

परिजनों के मुताबिक, भरखा निवासी श्रीपाल बुखार और कमजोरी से परेशान थे। इसी के चलते वह कथित चिकित्सक नीरज के पास इलाज कराने पहुंचे थे। आरोप है कि चिकित्सक ने पांच इंजेक्शन लगाने की बात कही थी। इससे पहले तीन इंजेक्शन लगाए जा चुके थे। चौथा इंजेक्शन लगने के करीब आधे घंटे बाद श्रीपाल की हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। पत्नी सदासुखी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार में दो बेटियां हैं, जिनमें छोटी बेटी दीक्षा की शादी अभी नहीं हुई है।


झोलाछापों पर कार्रवाई की मांग, फिर भी विभाग की चुप्पी!

परिजनों के अनुसार, घटना की सूचना मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दी गई थी, लेकिन उनका आरोप है कि मौके पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं पहुंचा। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। घटना ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आम जनमानस पूछ रहा है कि आखिर गांव-गांव में कथित झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? अवैध रूप से चिकित्सा करने वालों पर शिकंजा कसने की जिम्मेदारी किसकी है? शिकायतें सामने आने के बावजूद यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो गरीब और असहाय लोग इलाज के नाम पर जोखिम उठाने को मजबूर रहेंगे। सवाल यह भी है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेगा?

पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव

सूचना पर राजेपुर थानाध्यक्ष दर्शन सिंह सोलंकी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच की जा रही है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद स्पष्ट होगा।

अब संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता, इलाज के अभिलेखों और लगाए गए इंजेक्शन की जांच कराई जानी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

बड़ा सवाल: आखिर स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा और कथित झोलाछापों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी? आम जनमानस जवाब चाहता है—गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ के आरोपों पर आखिर कब टूटेगी विभाग की गहरी नींद?

 

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